Category ज्योतिष शास्त्र

दान और ग्रह—एक गहरी समझ: क्या दान करें, कब करें और क्यों करें?

Graho Ka Daan Kaise Kare?

ग्रहों का दान कैसे करें? Graho Ka Daan Kaise Kare? ज्योतिष में दान एक ऐसा उपाय माना जाता है जिसके माध्यम से हम कुंडली में अशुभ ग्रहों की तीव्रता को कम कर सकते हैं और जीवन में संतुलन ला सकते…

गंड-मूल दोष की एक सरल लेकिन गूढ़ ज्योतिषीय व्याख्या भाग-2।

Gandmool Dosh Kya Hota Hai?

Gandmool Dosh Kya Hota Hai? इस विस्तृत लेख के पहले भाग में हमने इसके मूल सिद्धांतों को समझा— क्यों केवल छह नक्षत्र गंडमूल माने जाते हैं, राशि–नक्षत्र की संधि स्थिति क्यों संवेदनशील होती है, गंड (अंत) और मूल (आरम्भ) का…

गंड-मूल दोष की एक सरल लेकिन गूढ़ ज्योतिषीय व्याख्या भाग-1।

Gandmool Dosh Kya Hota Hai?

गंडमूल दोष क्या होता है? Gandmool Dosh in Hindi — ज्योतिष शास्त्र में कुल 27 नक्षत्र होते हैं, लेकिन इनमें से केवल 6 नक्षत्र ऐसे हैं जिन्हें गंडमूल नक्षत्र कहा गया है। ये हैं: अश्विनी, मघा, मूल, रेवती, अश्लेषा और…

लग्न दोष भाग-3 जब दोष गुरु बनता है — अंतिम विश्लेषण और समाधान।

Lagna Dosh In Kundali

प्रस्तावना — इस तीसरे भाग में हम क्या देखने वाले हैं? लग्न दोष (Lagna Dosh In Kundali) पर आधारित इस तीन-भागीय श्रृंखला में अब हम उसके अंतिम और सबसे निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुके हैं। पहले भाग में हमने…

भाग 1 से आगे: अब सिद्धांत से अनुभव की ओर की यात्रा।

Lagna Dosh In Kundali

भाग-1 में हमने लग्न दोष (Lagna Dosh Kya Hai) के सिद्धांत को उसके मूल स्वरूप में समझा— कि लग्न क्या है, लग्नेश किसे कहते हैं, त्रिक भाव किस प्रकार आत्मबल को प्रभावित करते हैं, और जब लग्नेश पीड़ित हो जाए…

लग्न दोष – भाग 1: आत्मबल की कमजोरी और जीवन की दिशा पर उसका प्रभाव।

Lagna Dosh In Kundali

परिचय: जब ‘मैं’ ही कमजोर पड़ जाए मनुष्य के जीवन में सबसे बड़ी शक्ति क्या है? न धन, न यश, न संबंध — बल्कि “स्वयं” की अनुभूति। जब यह “मैं” जागृत होता है, तो असंभव भी संभव प्रतीत होता है;…

पाया विचार – जन्म के पैर का वास्तविक महत्व।

Paya in Astrology in Hindi

भूमिका – जन्म के पैर की लोक-मान्यता और वास्तविकता Paya in Astrology — भारत में जब किसी घर में नवजात शिशु का जन्म होता है, तो सबसे पहले घर के बड़े-बुजुर्ग पंडित से यह प्रश्न करते हैं — “बच्चे के…

अष्टम–द्वादश सिद्धांत: मृत्यु, व्यय और जीवन-ऊर्जा का रहस्य।

Ashtam Dwadash Theory in Astrology in Hindi

प्रस्तावना: अष्टम–द्वादश सिद्धांत क्या है? ज्योतिष में जब हम “जीवन” की बात करते हैं, तो साथ-साथ “मृत्यु” भी उसी परिपथ का हिस्सा होती है। अष्टम–द्वादश सिद्धांत (Ashtam Dwadash Theory, 8–12 Theory) इसी चक्र का गूढ़ रहस्य खोलता है। यह सिद्धांत…

भावत भावम भाग 4 का अंतिम उपभाग: धर्म से मोक्ष तक की अंतिम यात्रा।

Bhavat Bhavam In Astrology In Hindi

प्रिय पाठक, “Bhavat Bhavam in Astrology in Hindi” आप भावत भावम सिद्धांत की इस अद्भुत यात्रा के अंतिम पड़ाव पर पहुँच चुके हैं। यह वह चरण है जहाँ धर्म, कर्म, लाभ और मोक्ष — चारों पुरुषार्थ अपने गूढ़ अर्थों में…

भावत भावम सिद्धांत – भाग 4 : एक वास्तविक कुंडली पर शोधात्मक प्रयोग का दूसरा भाग।

Bhavat Bhavam In Astrology In Hindi

प्रिय पाठक, यदि आप सीधे इस भाग से पढ़ना शुरू कर रहे हैं, तो आपसे विनम्र निवेदन है — कृपया इस श्रृंखला के प्रारंभिक तीन भागों और फिर भाग ४ के पहले उपभाग (प्रथम से चतुर्थ भाव तक) को अवश्य…