Category जीवन दर्शन

माता-पिता : त्याग की वह कथा, जिसे शब्दों ने नहीं—समय ने लिखा है।

Parent Child Relationship

आज के समय में Parent Child Relationship पहले जैसी सरल और सहज नहीं रही। बदलती सोच, तेज़ जीवनशैली और बढ़ती व्यक्तिगत स्वतंत्रता ने रिश्तों को अधिक संवेदनशील बना दिया है। कई बार हम बिना सोचे बोले गए कुछ शब्दों से…

मृत्यु का रहस्य और जीवन दर्शन।

Death and Life Philosophy

मृत्यु मानव जीवन का वह सत्य है, जिसे हर कोई जानता है, फिर भी उससे सबसे अधिक बचता है। जैसे ही मृत्यु का विचार आता है, मन में डर, असहजता और अनकही बेचैनी जन्म लेने लगती है। शायद इसी कारण…

वर्तमान में जीने का महत्व: क्यों ‘अभी’ में जीना सबसे ज़रूरी है?

Living in the Present Moment in Hindi

हमारा शरीर हमेशा वर्तमान क्षण में ही मौजूद होता है, लेकिन मन प्रायः या तो बीते हुए कल में उलझा रहता है या आने वाले कल की कल्पनाओं में भटकता रहता है। यहीं से हमारे जीवन में तनाव, असंतोष और…

कर्म और भाग्य का जीवन में स्थान।

Karma Aur Bhagya Ka Sambandh in Hindi

अधिकांशतः जब हम जीवन में असफलता, दुख या संघर्ष का सामना करते हैं, तो हम तुरंत कह देते हैं—“यह तो भाग्य में लिखा था।” यही सोच धीरे-धीरे हमको निष्क्रिय बना देती है। वास्तव में, karma aur bhagya ka sambandh उतना…

मन, बुद्धि और आत्मा का संतुलन।

Mind intellect Soul Balance in Hindi

जीवन में बहुत-से लोग बाहरी रूप से सुव्यवस्थित दिखाई देते हैं, पर भीतर एक गहरी असंतुलन की स्थिति से गुजर रहे होते हैं। इसका मूल कारण अक्सर mind intellect soul balance का अभाव होता है। मन अपनी इच्छाओं और प्रतिक्रियाओं…

जीवन में विवेक का महत्व।

Vivek in life in Hindi

हम आज पहले से कहीं अधिक जानते हैं। जानकारी, किताबें, अनुभव, सलाह—सब कुछ हमारे पास है, फिर भी जीवन में वही गलतियाँ दोहराई जाती हैं। इसका कारण अज्ञान नहीं, बल्कि समझ की कमी है। जानकारी बाहर से आती है, लेकिन…

आत्मा और शरीर का संबंध।

Atma aur Sharir Ka Sambandh

मनुष्य अपने जीवन का अधिकांश समय शरीर की आवश्यकताओं, सुविधाओं और सुरक्षा में ही लगा देता है। धीरे-धीरे वह अपनी पहचान अपने शरीर, रूप, आयु और सामाजिक भूमिका से जोड़ लेता है। इसी कारण Atma aur sharir ka sambandh उसके…

जीवन में संतुलन कैसे बनाएं?

jivan me santulan kaise banaye

आज का मनुष्य बाहर से जितना सक्रिय और व्यस्त दिखाई देता है, भीतर से उतना ही बिखरा हुआ महसूस करता है। दिन भर की भागदौड़, जिम्मेदारियों का बोझ और निरंतर अपेक्षाएँ जीवन को आगे तो ले जाती हैं, पर भीतर…

सुख और दुःख का वास्तविक अर्थ।

sukh aur dukh kya hai

मनुष्य का पूरा जीवन जैसे एक ही धुरी पर घूमता है— Sukh Aur Dukh। जन्म से लेकर मृत्यु तक, हर निर्णय, हर प्रयास और हर संघर्ष कहीं न कहीं इन्हीं दो अनुभवों से जुड़ा होता है। हम जिसे जीवन कहते…

जीवन का उद्देश्य क्या है?

Jeevan Ka Uddeshya Kya Hai?

आज का आधुनिक जीवन एक endless दौड़ बन गया है—डिग्री, जॉब, पैसा, सोशल स्टेटस, और “next milestone”। बाहर से सब कुछ चल रहा होता है, लेकिन अंदर कहीं एक खालीपन धीरे-धीरे बढ़ता जाता है। यही वो जगह है जहाँ Jeevan…